🌞 मकर संक्रांति : कारण, वैज्ञानिक महत्व और सनातन मान्यता (2026)
✨ मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?
मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख सौर पर्व है। यह पर्व उस दिन मनाया जाता है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को ही संक्रांति कहा जाता है।
इस दिन से सूर्य की गति उत्तर दिशा (उत्तरायण) की ओर हो जाती है, जिससे दिन धीरे‑धीरे बड़े होने लगते हैं और रात्रि छोटी होने लगती है। यही कारण है कि मकर संक्रांति को प्रकाश, ऊर्जा और सकारात्मकता का पर्व माना जाता है।
🔬 मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व
☀️ 1. खगोलीय परिवर्तन
मकर संक्रांति सूर्य के खगोलीय गोचर से जुड़ा पर्व है। इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर बढ़ता है, जिससे पृथ्वी पर सूर्य की किरणें अधिक प्रभावी होने लगती हैं।
🌾 2. ऋतु परिवर्तन और कृषि
यह पर्व शीत ऋतु से वसंत ऋतु की ओर परिवर्तन का संकेत देता है। किसान वर्ग के लिए यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि फसल कटाई, नई फसल की तैयारी और कृषि गतिविधियाँ इसी समय तेज होती हैं।
🧬 3. स्वास्थ्य पर प्रभाव
उत्तरायण काल में सूर्य की किरणें शरीर के लिए अधिक लाभकारी मानी जाती हैं। इसी कारण तिल, गुड़, खिचड़ी जैसे ऊष्मायुक्त एवं पौष्टिक आहार का सेवन परंपरागत रूप से किया जाता है।
📿 सनातन धर्म में मकर संक्रांति का महत्व
🔔 1. उत्तरायण का पुण्यकाल
सनातन धर्म में उत्तरायण को अत्यंत शुभ और पुण्यदायक काल माना गया है। इस समय किए गए दान, जप, तप, स्नान और पूजा का फल कई गुना प्राप्त होता है।
☀️ 2. सूर्य देव की उपासना
सूर्य को सनातन धर्म में प्रत्यक्ष देवता माना गया है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा, अर्घ्य, और मंत्र जाप का विशेष महत्व है।
📖 3. भीष्म पितामह की कथा
महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने उत्तरायण के आरंभ की प्रतीक्षा करते हुए देह त्याग किया था। यह कथा उत्तरायण और मकर संक्रांति की आध्यात्मिक महत्ता को दर्शाती है।
🪔 मकर संक्रांति से जुड़ी परंपराएँ
- पवित्र नदियों में स्नान (गंगा, यमुना आदि)
- तिल‑गुड़, खिचड़ी, दही‑चूड़ा आदि का सेवन
- दान‑पुण्य और सेवा कार्य
- पतंग उड़ाने की परंपरा
भारत के विभिन्न राज्यों में यह पर्व अलग‑अलग नामों से मनाया जाता है:
- तमिलनाडु – पोंगल
- पंजाब – लोहड़ी
- असम – माघ बिहू
- गुजरात/राजस्थान – उत्तरायण
📅 2026 में मकर संक्रांति कब है?
🔸 मुख्य तिथि (सूर्य गोचर के अनुसार):
👉 14 जनवरी 2026 (बुधवार)
🔸 अधिकांश पंचांगों और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा, इसलिए यही मकर संक्रांति की मुख्य तिथि मानी जाएगी।
🔸 कुछ स्थानों पर स्नान‑दान का पुण्यकाल 15 जनवरी 2026 को भी माना जा सकता है, जो स्थानीय पंचांग पर निर्भर करता है।
🧾 संक्षेप में
| विषय | विवरण |
|---|---|
| पर्व का नाम | मकर संक्रांति |
| आधार | सूर्य का मकर राशि में प्रवेश |
| वैज्ञानिक महत्व | ऋतु परिवर्तन, ऊर्जा वृद्धि |
| धार्मिक महत्व | उत्तरायण, सूर्य उपासना, पुण्यकाल |
| 2026 की तिथि | 14 जनवरी 2026 (बुधवार) |