नई दिल्ली :: 30 मार्च 2026: केंद्र सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना को और प्रभावी बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म और नीतिगत सुधारों के जरिए ऋण तक पहुंच आसान बनाई जा रही है।
किसानों के लिए बढ़ी ऋण की पहुंच
सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा तय प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) के नियमों के तहत बैंकों को कृषि क्षेत्र में कम से कम 18% ऋण देना अनिवार्य किया गया है। इसमें 10% हिस्सा छोटे और सीमांत किसानों के लिए निर्धारित है, जिससे इस वर्ग को विशेष लाभ मिल रहा है।
अब पशुपालन और मत्स्य पालन भी शामिल
साल 2019 से KCC योजना का दायरा बढ़ाकर पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया गया है, जिससे किसानों की आय के स्रोत बढ़े हैं।
सस्ती ब्याज दर का लाभ
सरकार की संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तहत किसानों को 7% की रियायती दर पर लोन मिलता है। समय पर भुगतान करने पर 3% अतिरिक्त छूट मिलती है, जिससे ब्याज दर घटकर सिर्फ 4% रह जाती है।
बिना गारंटी लोन सीमा बढ़ी
1 जनवरी 2025 से बिना गारंटी के कृषि ऋण की सीमा 1.60 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है। इससे खासकर छोटे किसानों को बड़ी राहत मिली है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से आसान आवेदन
सरकार ने जन समर्थ पोर्टल लॉन्च किया है, जहां किसान ऑनलाइन KCC के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा नाबार्ड द्वारा ई-KCC पोर्टल और बैंकों के मोबाइल ऐप्स के जरिए भी पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो गई है।
किसानों को योजना का लाभ देने के लिए सरकार, बैंक और संस्थाएं वित्तीय साक्षरता शिविर और कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ रही है।
शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत
बैंकिंग सेवाओं में सुधार के लिए CPGRAMS जैसे प्लेटफॉर्म और लोकपाल योजना लागू की गई है, जिससे किसान अपनी शिकायतें आसानी से दर्ज करा सकते हैं।
सरकार के इन प्रयासों से किसान क्रेडिट कार्ड योजना अधिक सुलभ, डिजिटल और किसान-हितैषी बन रही है। खासकर छोटे और सीमांत किसानों को इससे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे उनकी आय और आर्थिक स्थिरता दोनों में सुधार होगा।