द गुरुकुलम स्कूल, वाराणसीमाँ के प्रेम और त्याग को समर्पित रहा “मातृत्व” समारोहगीत, नृत्य और प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने बाँधा समांमातृत्व के रंग में सराबोर हुआ ‘द’ गुरुकुलम स्कूल, मातृ शक्ति के सम्मान में सजा भव्य आयोजनवाराणसी नगर स्थिति : द गुरुकुलम स्कूल द्वारा मातृ दिवस के अवसर पर “मातृत्व” शीर्षक से आयोजित विशेष समारोह ने संस्कार, संवेदना और स्नेह का अनुपम संगम प्रस्तुत किया। विद्यालय परिसर स्थित संस्कारम हॉल में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में माताओं, अभिभावकों एवं अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भावनाओं से सराबोर कर दिया।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। विद्यालय के संचालकों ने अतिथियों एवं अभिभावकों का आत्मीय स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके पश्चात अतिथियों का सम्मान एवं परिचय वाचन किया गया।कार्यक्रम की विशेष आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ रहीं। कक्षा 3 से 5 के विद्यार्थियों ने “मातृत्व — प्रेम की स्वर लहरियाँ” शीर्षक समूहगान प्रस्तुत कर माँ के त्याग, प्रेम और ममता को मधुर स्वरों में अभिव्यक्त किया। वहीं कक्षा 1 एवं 2 के नन्हे विद्यार्थियों की मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियाँ “माँ के पुराने सुनहरे पल” एवं “माँ की मधुर धुन” ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों की मासूम अदाओं और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित अभिभावकों को भावुक कर दिया।कार्यक्रम के दौरान आयोजित “माँ की शान” फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता एवं “माँ के कदम” रेट्रो थीम नृत्य प्रतियोगिता में माताओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। आत्मविश्वास, उत्साह और पारिवारिक संस्कारों से परिपूर्ण इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में जीवंतता भर दी।“माँ के प्रेम की गूंज” शीर्षक से प्रस्तुत काव्यांजलि ने मातृत्व की संवेदनाओं को शब्दों के माध्यम से अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं “माँ की सुरमयी जंग” अंताक्षरी प्रतियोगिता ने मनोरंजन एवं उत्साह का वातावरण बना दिया।विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती प्रियंका मुखर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि माँ जीवन की प्रथम गुरु होती है, जिनके संस्कार बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला बनते हैं। उन्होंने कहा कि मातृत्व केवल एक संबंध नहीं, बल्कि त्याग, धैर्य और निस्वार्थ प्रेम का जीवंत स्वरूप है।कार्यक्रम के समापन अवसर पर निर्णायक मंडल द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित किए गए तथा विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। उपप्रधानाचार्या शिल्पा राजे द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अभिभावकों, अतिथियों एवं विद्यालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया गया।पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट और भावनात्मक पलों से गूंजता रहा। “मातृत्व” समारोह ने न केवल मातृ शक्ति को सम्मानित किया, बल्कि भारतीय संस्कारों एवं पारिवारिक मूल्यों की सुंदर झलक भी प्रस्तुत की।
‘द’ गुरुकुलम स्कूल वाराणसी प्रेस विज्ञप्ति दिनांक: 09 मई 2026दिन: शनिवारस्थान: द गुरुकुलम स्कूल, वाराणसीमाँ के प्रेम और त्याग को समर्पित रहा “मातृत्व” समारोहगीत, नृत्य और प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने बाँधा समांमातृत्व के रंग में सराबोर हुआ ‘द’ गुरुकुलम स्कूल, मातृ शक्ति के सम्मान में सजा भव्य आयोजनवाराणसी नगर स्थिति : द गुरुकुलम स्कूल द्वारा मातृ दिवस के अवसर पर “मातृत्व” शीर्षक से आयोजित विशेष समारोह ने संस्कार, संवेदना और स्नेह का अनुपम संगम प्रस्तुत किया। विद्यालय परिसर स्थित संस्कारम हॉल में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में माताओं, अभिभावकों एवं अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भावनाओं से सराबोर कर दिया।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। विद्यालय के संचालकों ने अतिथियों एवं अभिभावकों का आत्मीय स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके पश्चात अतिथियों का सम्मान एवं परिचय वाचन किया गया।कार्यक्रम की विशेष आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ रहीं। कक्षा 3 से 5 के विद्यार्थियों ने “मातृत्व — प्रेम की स्वर लहरियाँ” शीर्षक समूहगान प्रस्तुत कर माँ के त्याग, प्रेम और ममता को मधुर स्वरों में अभिव्यक्त किया। वहीं कक्षा 1 एवं 2 के नन्हे विद्यार्थियों की मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियाँ “माँ के पुराने सुनहरे पल” एवं “माँ की मधुर धुन” ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों की मासूम अदाओं और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित अभिभावकों को भावुक कर दिया।कार्यक्रम के दौरान आयोजित “माँ की शान” फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता एवं “माँ के कदम” रेट्रो थीम नृत्य प्रतियोगिता में माताओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। आत्मविश्वास, उत्साह और पारिवारिक संस्कारों से परिपूर्ण इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में जीवंतता भर दी।“माँ के प्रेम की गूंज” शीर्षक से प्रस्तुत काव्यांजलि ने मातृत्व की संवेदनाओं को शब्दों के माध्यम से अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं “माँ की सुरमयी जंग” अंताक्षरी प्रतियोगिता ने मनोरंजन एवं उत्साह का वातावरण बना दिया।विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती प्रियंका मुखर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि माँ जीवन की प्रथम गुरु होती है, जिनके संस्कार बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला बनते हैं। उन्होंने कहा कि मातृत्व केवल एक संबंध नहीं, बल्कि त्याग, धैर्य और निस्वार्थ प्रेम का जीवंत स्वरूप है।कार्यक्रम के समापन अवसर पर निर्णायक मंडल द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित किए गए तथा विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। उपप्रधानाचार्या शिल्पा राजे द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अभिभावकों, अतिथियों एवं विद्यालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया गया।पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट और भावनात्मक पलों से गूंजता रहा। “मातृत्व” समारोह ने न केवल मातृ शक्ति को सम्मानित किया, बल्कि भारतीय संस्कारों एवं पारिवारिक मूल्यों की सुंदर झलक भी प्रस्तुत की।