देश में ‘मीडिया कल्याण बोर्ड’ के गठन की उठी मांग: ए.के. बिंदुसार ने सरकार के समक्ष रखा प्रस्ताव गिनाए कानूनी प्रावधान।
नई दिल्ली। समस्त प्रदेश के पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के हितों को लेकर यूनियन के संस्थापक ए.के. बिंदुसार ने एक बड़ा आह्वान किया है। उन्होंने सभी प्रदेशों के सरकार से मांग की है कि पत्रकारों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य में तत्काल ‘मीडिया कल्याण बोर्ड’ (Media Welfare Board) का गठन किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक मांग नहीं, बल्कि पत्रकारों का संवैधानिक अधिकार है।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को सुरक्षा की दरकार,
अपने संबोधन में बिंदुसार ने कहा, “सच्चाई लिखने वाले पत्रकारों पर आए दिन हमले और उनकी आर्थिक बदहाली चिंता का विषय है। जब अन्य क्षेत्रों के लिए कल्याण बोर्ड हो सकते हैं, तो लोकतंत्र के रक्षक पत्रकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए क्यों नहीं?” उन्होंने समस्त प्रदेश सरकार से अपील करते हुए इसे एक विधिवत कानूनी ढांचे में ढालने का प्रस्ताव रखा।
इन कानूनी धाराओं और प्रावधानों का दिया हवाला,

ए.के. बिंदुसार ने बोर्ड के गठन के लिए ठोस कानूनी आधार पेश किए:
1- संविधान का अनुच्छेद 162: उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के पास अपनी कार्यकारी शक्तियों के तहत ऐसे बोर्ड बनाने का पूर्ण अधिकार है।
2- अनुच्छेद 41 (लोक सहायता): सरकार का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह बीमारी, वृद्धावस्था या असमर्थता की स्थिति में नागरिकों (विशेषकर जोखिम भरे क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों) की मदद करे।
3- बीओसीडब्ल्यू (BOCW) मॉडल: जिस तरह निर्माण श्रमिकों के लिए धारा 18 के तहत बोर्ड कार्य करते हैं, उसी तर्ज पर पत्रकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए भी एक ‘सेल्फ-सस्टेनिंग’ बोर्ड की रूपरेखा तैयार की जानी चाहिए।


प्रस्तावित बोर्ड की मुख्य मांगें:
1-पत्रकार सुरक्षा कोष: ड्यूटी के दौरान घायल होने या मृत्यु होने पर परिवार को 20 लाख रुपये तक की तत्काल आर्थिक सहायता।
2-पेंशन एवं स्वास्थ्य: 60 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकारों के लिए सम्मानजनक पेंशन और ‘कैशलेस’ इलाज की सुविधा।
3- आवास एवं शिक्षा: पत्रकारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा में आरक्षण और सरकारी आवास योजनाओं में प्राथमिकता।
4- विधिक सहायता: पत्रकारों पर होने वाले फर्जी मुकदमों से लड़ने के लिए बोर्ड द्वारा मुफ्त कानूनी सलाह और सहायता।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और यूनियनों से एकजुट होने की अपील,
बिंदुसार ने प्रदेश के समस्त सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकार संगठनों से अपील की है कि वे इस मुहिम का हिस्सा बनें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस दिशा में जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तो यूनियन इस मांग को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी।
“पत्रकार समाज का दर्पण है, और यदि दर्पण ही सुरक्षित नहीं रहेगा तो समाज की सही तस्वीर धुंधली हो जाएगी।” — ए.के. बिंदुसार




