रिपोर्ट : सुरेश गुप्ता
चंदौली ब्यूरो :: चंदौली जनपद के सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत रेवासा धुस गांव में स्थित आदि हिन्दू प्राइमरी पाठशाला वर्ष 1936 से संचालित है। लगभग नौ दशक बीत जाने के बाद भी यह विद्यालय आज तक अपने स्वयं के पक्के भवन से वंचित है। वर्तमान स्थिति यह है कि विद्यालय के नाम पर केवल एक झुग्गीनुमा ढांचा मौजूद है, जहां न तो पर्याप्त कक्षाएं हैं और न ही मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं।

” सुविधाओं के अभाव में पेड़ के नीचे बैठ कर शिक्षा लेते छात्र। “
विद्यालय में कक्षा 1 से 5 तक कुल लगभग 66 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। लेकिन उन्हें पढ़ाई के लिए न तो बैठने हेतु टेबल-कुर्सियां उपलब्ध हैं और न ही समुचित कक्ष। बच्चे खुले मैदान में पेड़ के नीचे जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। इसके अतिरिक्त विद्यालय में बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी अत्यंत आवश्यक सुविधाओं का भी अभाव है, जिससे बच्चों और शिक्षकों दोनों को दैनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
यह विद्यालय समाज कल्याण विभाग, चंदौली द्वारा संचालित है, जहां वर्तमान में एक महिला और एक पुरुष शिक्षक कार्यरत हैं। विद्यालय के आसपास मुख्य रूप से पिछड़े वर्ग एवं अनुसूचित समुदाय के लोग निवास करते हैं, और क्षेत्र में दूर-दूर तक अन्य कोई शैक्षणिक संस्थान उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यह विद्यालय स्थानीय बच्चों के लिए शिक्षा का एकमात्र माध्यम बना हुआ है।
विद्यालय के शिक्षकों के अनुसार, लगभग एक वर्ष पूर्व जिला मजिस्ट्रेट द्वारा भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे जिला समाज कल्याण विकास विभाग के माध्यम से जिला पंचायत अध्यक्ष, चंदौली को अग्रसारित किया गया था। हालांकि, अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्य धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है।
एक ओर जहां सरकार द्वारा शिक्षा के प्रसार और सर्वांगीण विकास के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर इस प्रकार की जमीनी हकीकत कई सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि बिना बुनियादी सुविधाओं के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि विद्यालय के भवन निर्माण सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं को जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए, ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
