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नई दिल्ली/टेक्नोलॉजी :: 30 मार्च 2026: वैज्ञानिकों ने ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसमें अब इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों से निकली सामग्री का दोबारा उपयोग कर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह तकनीक न सिर्फ बैटरी कचरे को कम करेगी बल्कि ईंधन सेल की क्षमता भी बढ़ाएगी।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत कार्यरत ARCI के वैज्ञानिकों ने लिथियम-आयन बैटरियों से निकले ग्रेफाइट को पुनः उपयोग करने की तकनीक विकसित की है।

कैसे काम करती है तकनीक?

  • बैटरी से निकले ग्रेफाइट को रासायनिक प्रक्रिया से सुधारकर उसकी क्षमता बढ़ाई जाती है
  • इसे ईंधन सेल में उपयोग कर ऑक्सीजन अपचयन प्रतिक्रिया (ORR) को बेहतर बनाया जाता है
  • यह प्रक्रिया प्लैटिनम उत्प्रेरक की दक्षता बढ़ाने में भी मदद करती है

क्या होंगे फायदे?

✔️ बैटरी कचरे का प्रभावी पुनर्चक्रण

✔️ ईंधन सेल की कार्यक्षमता और स्थिरता में सुधार

✔️ महंगे प्लैटिनम पर निर्भरता में कमी

✔️ स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा को बढ़ावा

पर्यावरण के लिए बड़ी राहत

यह तकनीक कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता को कम करती है और मेथनॉल सहनशीलता को बढ़ाती है, जिससे ईंधन सेल लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी।

वैज्ञानिकों की यह खोज बैटरी कचरे को मूल्यवान संसाधन में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आने वाले समय में यह तकनीक स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

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