चंदौली ब्यूरो :: मुगलसराय के दवा व्यवसायी रोहिताश पाल (46) हत्याकांड मामले में लखनऊ स्थित राज्य मानवाधिकार आयोग ने चंदौली के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से स्पष्टीकरण तलब किया है। आयोग ने मुख्य शूटरों और साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारी न होने तथा समय पर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत न किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है।
गौरतलब है कि 18 नवंबर 2025 की रात करीब 10:30 बजे पीडीडीयू नगर स्थित जीटी रोड पर अज्ञात हमलावरों ने रोहिताश पाल को सिर में गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
इस मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ता और सिविल बार एसोसिएशन चंदौली के पूर्व उपाध्यक्ष एडवोकेट खालिद वकार आबिद ने 25 नवंबर 2025 को राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में करीब 29 बिस्वा की बहुमूल्य जमीन (लगभग 58 करोड़ रुपये) को लेकर हत्या की साजिश की आशंका जताते हुए भूमाफिया और प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता का आरोप लगाया गया है। साथ ही पुलिस पर इन पहलुओं की गंभीरता से जांच न करने का आरोप भी लगाया गया। आयोग ने इस प्रकरण को केस संख्या 26227/24/19/2025 के तहत दर्ज किया है।आयोग के 21 जनवरी 2026 के आदेश के बाद चंदौली के अपर पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) एवं नोडल अधिकारी ने 6 फरवरी 2026 को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसका आयोग ने अवलोकन किया।
इसके बाद 10 मार्च 2026 को आयोग ने निर्देश दिया कि जांच रिपोर्ट की प्रति शिकायतकर्ता एडवोकेट खालिद वकार आबिद को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उन्हें 27 अप्रैल 2026 तक अपनी आपत्तियां या अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।इस संबंध में एडवोकेट खालिद वकार आबिद ने कहा कि यह मामला न सिर्फ एक जघन्य हत्या का है, बल्कि निष्पक्ष जांच, कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने सीबीआई जांच, सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग दोहराई है।