ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस व वन विभाग की टीम, उपचार के प्रयास के बावजूद नहीं बच सकी जान
चंदौली। नियामताबाद क्षेत्र के लखापुर गांव में बंदरों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में आक्रोश और चिंता का माहौल बन गया। ग्रामीणों के अनुसार कुछ बंदर अचानक अचेत होकर गिरने लगे और देखते ही देखते उनकी हालत गंभीर हो गई।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि किसी व्यक्ति द्वारा केले में जहरीला पदार्थ मिलाकर बंदरों को खिलाया गया हो सकता है। हालांकि, जहर दिए जाने की बात अभी जांच का विषय है और इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटना की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम/वेटरिनरी जांच तथा आवश्यक साक्ष्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मामले की सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने पुलिस को बुलाया। इसके बाद वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और बीमार बंदरों को उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें बचाया नहीं जा सका।
क्या बेजुबान जीवों को जीने का अधिकार नहीं?
बंदरों को हमारे समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से भी विशेष स्थान प्राप्त है। अनेक लोग उन्हें श्रद्धा से भोजन कराते हैं और केले, गुड़ आदि खिलाते हैं। ऐसे में यदि किसी ने जानबूझकर जहरीला पदार्थ देकर इन बेजुबान जीवों की जान लेने का प्रयास किया है, तो यह बेहद गंभीर और संवेदनहीन कृत्य है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो जीव अपनी बात इंसानों की तरह कह नहीं सकते, क्या उन्हें जीने का अधिकार नहीं है? यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर इन्हें नुकसान पहुंचाया है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
जानवर को जहर देकर मारने पर कौन-सी धारा लग सकती है?
वर्तमान कानून में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 325 विशेष रूप से किसी पशु को मारने, जहर देने, अंग-भंग करने या उसे अनुपयोगी बनाने से संबंधित है। इसमें पांच वर्ष तक की सजा, या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
इसके अलावा Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 भी पशुओं के प्रति क्रूरता को नियंत्रित करता है और उसकी धारा 11 पशुओं के साथ क्रूर व्यवहार से संबंधित है।
हालांकि, इस घटना में कौन-कौन सी धाराएं लागू होंगी, यह पुलिस की जांच, उपलब्ध साक्ष्य और मेडिकल/वेटरिनरी रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि घटना की गंभीरता से जांच कराई जाए, यदि जहर देने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में बेजुबान जीवों के साथ ऐसी घटना दोबारा न हो।