नई दिल्ली/वाराणसी: आज देशभर में अक्षय तृतीया का पावन पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को ‘अक्षय तृतीया’ या ‘आखा तीज’ कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इसे ‘अबूझ मुहूर्त’ माना गया है, जिसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने या विशेष मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती।
क्यों मनाया जाता है अक्षय तृतीया? (पौराणिक महत्व)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन का महत्व कई ऐतिहासिक और पौराणिक घटनाओं से जुड़ा है:
1.भगवान परशुराम का जन्मोत्सव: अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान विष्णु के छठे अवतार, श्री परशुराम जी का जन्म हुआ था।
2.सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ: माना जाता है कि इसी तिथि से सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी।
3.गंगा अवतरण: पौराणिक कथाओं के अनुसार, आज ही के दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं।
4.पांडवों को अक्षय पात्र: वनवास के दौरान इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को ‘अक्षय पात्र’ दिया था, जिससे भोजन कभी समाप्त नहीं होता था।
5.सुदामा और कृष्ण का मिलन: गरीब ब्राह्मण सुदामा जब अपने मित्र श्री कृष्ण से मिलने पहुंचे थे, तो प्रभु ने उनकी दरिद्रता इसी दिन दूर की थी।
6.बद्रीनाथ धाम के कपाट: चारधाम यात्रा के प्रमुख पड़ाव भगवान बद्रीनाथ के कपाट भी इसी पावन तिथि को खोले जाते हैं।
दान और खरीदारी का विशेष महत्व
शब्द ‘अक्षय’ का अर्थ है जिसका कभी ‘क्षय’ (विनाश) न हो। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान, तप और शुभ कार्यों का फल अनंत काल तक मिलता है।
• सोने की खरीदारी: इस दिन सोना खरीदना सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। लोग नई संपत्ति, वाहन या व्यापार की शुरुआत के लिए इस दिन को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं।
• महादान: भीषण गर्मी के इस मौसम में जल से भरे घड़े (कलश), पंखे, छतरी और अन्न का दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
आज का शुभ समय (2026)
इस वर्ष 19 अप्रैल को तृतीया तिथि सुबह 10:49 बजे से शुरू होकर अगले दिन 20 अप्रैल सुबह 07:27 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार आज पूरे दिन पूजा और खरीदारी का विशेष संयोग बना हुआ है।
ब्यूरो रिपोर्ट: bharattimestoday