आदिवासी नेता अधिवक्ता विजय गोंड बॉर्डर प्रदेश उपाध्यक्ष समाजवादी अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के के नेतृत्व में चकिया तहसील के मां काली पोखरा से विकाश खंड चकिया नगर भ्रमण करते हुए वन विश्राम गृह प्रांगण चकिया जनपद चंदौली में आदिवासी गोंड राजाओं द्वारा स्थापित गोंडवाना के राज चिन्ह हाथी के ऊपर शेर को माल्यार्पण किया ।गोंडवाना का राज्य क्षेत्र विंध्य की पहाड़ी, कैमूर की पहाड़ी ,बुंदेलखंड की पहाड़ियों से सटा हुआ था जनपद चंदौली जो कि विंध्य पहाड़ी क्षेत्र से सटा हुआ है यह जिला बिहार राज्य झारखंड राज्य से भी सटा हुआ है। यहां आदिवासी समाज बहुलता की श्रेणी में आते हैं यह जिला जल जंगल जमीन पहाड़ों से आच्छादित है। इस जनपद के नौगढ़ में गोंड राजाओं द्वारा नौगढ़ का किला स्थापित था ।जो कि आज विलुप्त होने के कगार पर है।
चकिया के दिलकुशा वन विश्राम गृह में गोंड राजाओं द्वारा स्थापित गोंडवाना का राज्य चिन्ह इसका जीता जागता उदाहरण है। जनपद चंदौली का आदिवासी समाज आज अपने ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित सुरक्षित व जिर्णोद्धार की मांग को पूर्व के वर्षों से करता आ रहा है जो कि आज यह धरोहर संरक्षित व सुरक्षित हो चुका है इसे जीर्णोधार करने की आवश्यकता है। आज जनपद चंदौली के साथ उत्तर प्रदेश का आदिवासी समाज अपने इस ऐतिहासिक धरोहर गोंडवाना के राज चिन्ह पर माल्यार्पण कर गर्व महसूस कर रहा है। गोंडवाना के राज चिन्ह के अवशेष जौनपुर के शाही पुल के पास, प्रयागराज के रसूलाबाद पुल के पास, उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों में भी इसके अवशेष हैं जो प्रमाण करते हैं कि इस धरती पर गोंडवाना का राज्य बृहद और संपन्न राज्य रहा जिसके अवशेष आज भी पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों में मिल रहे हैं।
राज चिन्ह खोजकर्ता: संतोष गोंड चकिया
गरीमामयी उपस्थिति: श्री संतोष गोंड जी, त्रिलोकी पासवान जी,सी पी खरवार जी ,टोनी खरवार जी,,संतोष गोंड प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य,रमापति गोंड जी, कांता गोंड जी, श्री दिनेश गोंड, श्री पन्ना गोंड प्रधान, श्री मिठाई गोंड प्रधान, ,संजीव गोंड,लक्ष्मण गोंड आदि

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