वाराणसी। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश को समर्पित संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इस वर्ष 31 अगस्त 2026, सोमवार को भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी पड़ रही है। उत्तर भारत की पूर्णिमांत परंपरा में इसे हेरंब संकष्टी चतुर्थी, गणेश चौथ और बहुला चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। वाराणसी के पंचांग के अनुसार आज चतुर्थी तिथि सुबह करीब 8:52 बजे से शुरू होकर 1 सितंबर सुबह 7:42 बजे तक रहेगी। (Panchang Calendar)

📜 आखिर कब से शुरू हुआ यह व्रत?

संकष्टी चतुर्थी की परंपरा अत्यंत प्राचीन मानी जाती है। इसके लिए किसी एक ऐतिहासिक वर्ष को निश्चित रूप से “व्रत की शुरुआत” कहना उचित नहीं है। धार्मिक ग्रंथों में इसकी अलग-अलग व्रत-कथाएं मिलती हैं।

हेरंब संकष्टी चतुर्थी की प्रमुख कथा में भगवान श्रीगणेश द्वारा माता पार्वती को तथा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को इस व्रत का माहात्म्य बताए जाने का वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार राजा नल की पत्नी रानी दमयंती अपने पति से वियोग और अनेक संकटों से परेशान थीं। महर्षि शरभंग ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी के दिन संकटनाशक चतुर्थी का व्रत और हेरंब गणपति की पूजा करने का मार्ग बताया।

दमयंती ने विधिपूर्वक व्रत किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसके प्रभाव से उन्हें अपने पति राजा नल, पुत्र और खोया हुआ राज्य वापस प्राप्त हुआ। इसी कारण इस चतुर्थी को संकटों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति से जोड़कर देखा जाता है। (Drik Panchang)

⚠️ एक महत्वपूर्ण बात

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की गणेश जन्मोत्सव वाली गणेश चतुर्थी अलग पर्व है, जो इस वर्ष सितंबर में आएगी। आज की तिथि कृष्ण पक्ष चतुर्थी यानी संकष्टी चतुर्थी है। इसलिए इसे महाराष्ट्र आदि में मनाई जाने वाली 10-दिवसीय गणेश स्थापना वाली गणेश चतुर्थी से अलग समझना चाहिए। (Drik Panchang)

🌙 वाराणसी पंचांग के अनुसार आज के प्रमुख समय

स्थान: वाराणसी, उत्तर प्रदेश

  • 🌅 सूर्योदय: सुबह 5:38 बजे
  • 🌇 सूर्यास्त: शाम 6:18 बजे
  • 🌙 चंद्रोदय: रात 8:05 बजे
  • 🌙 चंद्रास्त: सुबह 8:20 बजे
  • 🪔 कृष्ण तृतीया समाप्त: सुबह 8:52 बजे
  • 🕉️ कृष्ण चतुर्थी: सुबह 8:52 बजे से 1 सितंबर सुबह 7:42 बजे तक
  • नक्षत्र: रेवती, इसके बाद अश्विनी
  • 🧘 योग: गंड
  • 📅 वार: सोमवार
  • 📜 विक्रम संवत: 2083, सिद्धार्थी

ये समय वाराणसी के स्थानीय पंचांग से लिए गए हैं; अलग-अलग पंचांग पद्धति में 1–2 मिनट का अंतर संभव है। (Panchang Calendar)

🕉️ गणेश पूजा का सही समय

संकष्टी चतुर्थी की विशेषता यह है कि दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को चंद्रोदय के समय भगवान गणेश की पूजा तथा चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा है।

👉 आज वाराणसी में मुख्य समय:

🌙 चंद्रोदय: रात 8:05 बजे के आसपास

इसलिए गणेश जी की शाम की पूजा चंद्रोदय से पहले शुरू करके चंद्रोदय के समय गणेश पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देना उपयुक्त रहेगा। (Panchang Calendar)

🪔 पूजा की सरल और शास्त्रोक्त विधि

1️⃣ सुबह

स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ करें और भगवान गणेश का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।

संकल्प:

“ॐ श्री गणेशाय नमः।
आज मैं भगवान श्री गणेश की प्रसन्नता तथा समस्त संकटों के निवारण के लिए संकष्टी चतुर्थी व्रत का संकल्प करता/करती हूं।”

2️⃣ शाम को गणेश जी की स्थापना

भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें।

सबसे पहले:

  • जल से आचमन/शुद्धिकरण
  • गणेश जी का ध्यान
  • रोली/कुमकुम
  • अक्षत
  • फूल
  • दूर्वा
  • धूप
  • दीप
  • नैवेद्य

अर्पित करें।

🌿 गणेश जी को विशेष रूप से क्या चढ़ाएं?

दूर्वा भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। संभव हो तो 21 दूर्वा अर्पित करें।

इसके साथ:

  • लाल या पीले फूल
  • सिंदूर
  • अक्षत
  • मोदक/लड्डू
  • फल
  • गुड़
  • नारियल

चढ़ाया जा सकता है।

📿 कौन-सा मंत्र जपें?

पूजा के दौरान श्रद्धा से:

“ॐ गं गणपतये नमः”

का जाप करें।

इसके अतिरिक्त:

“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभकार्येषु सर्वदा॥”

का पाठ किया जा सकता है।

संकष्टी चतुर्थी पर गणेश अष्टोत्तरशतनाम या संकटनाशन स्तोत्र का पाठ भी किया जाता है। (Prokerala)

📖 व्रत कथा कब पढ़ें?

गणेश पूजा के बाद हेरंब संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।

आज की प्रमुख कथा राजा नल और रानी दमयंती से जुड़ी है। कथा में दमयंती ने संकटों से मुक्ति और अपने पति की प्राप्ति के लिए इस व्रत का पालन किया था। धार्मिक मान्यता के अनुसार उन्हें इसका शुभ फल प्राप्त हुआ। (Drik Panchang)

🌙 चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि

रात करीब 8:05 बजे चंद्रोदय के बाद चंद्रमा के दर्शन करें।

एक लोटे में:

  • स्वच्छ जल
  • थोड़ा अक्षत
  • फूल
  • रोली/चंदन

डालकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।

इसके बाद हाथ जोड़कर प्रार्थना करें:

“ॐ सोमाय नमः”

और भगवान गणेश से अपने तथा परिवार के संकट दूर करने की प्रार्थना करें।

इसके बाद भगवान गणेश को नैवेद्य अर्पित करके व्रत का पारण किया जाता है। संकष्टी व्रत में चंद्रदर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा बताई गई है। (Prokerala)

🛕 पूजा सामग्री की पूरी सूची

गणेश पूजा के लिए:

  • भगवान गणेश की प्रतिमा/चित्र
  • चौकी और लाल/पीला कपड़ा
  • जल का कलश
  • रोली/कुमकुम
  • अक्षत
  • सिंदूर
  • दूर्वा घास
  • लाल/पीले फूल
  • धूप/अगरबत्ती
  • घी या तेल का दीपक
  • कपूर
  • मोदक या लड्डू
  • गुड़
  • नारियल
  • केला/अन्य फल
  • पंचामृत
  • मौली/कलावा
  • पान-सुपारी
  • दक्षिणा

चंद्र अर्घ्य के लिए:
जल, अक्षत, फूल और चंदन/रोली पर्याप्त हैं।

🌾 व्रत में क्या खा सकते हैं?

यदि कोई व्यक्ति पूर्ण निर्जल व्रत नहीं रख रहा है तो अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार फलाहार किया जा सकता है।

फलाहार में सामान्यतः:

  • फल
  • दूध
  • दही
  • मखाना
  • साबूदाना
  • सिंघाड़े/कुट्टू का आटा
  • आलू
  • मूंगफली

आदि का प्रयोग किया जाता है।

🙏 व्रत करने से क्या लाभ माना जाता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार संकष्टी चतुर्थी का व्रत:

  • जीवन के संकटों और विघ्नों से मुक्ति
  • कार्यों में सफलता
  • मानसिक शांति
  • परिवार की सुख-समृद्धि
  • मनोकामना पूर्ति
  • संतान एवं परिवार के मंगल
  • भगवान गणेश की कृपा

के लिए किया जाता है।

हालांकि इन लाभों को धार्मिक आस्था और परंपरा की मान्यता के रूप में समझना चाहिए, वैज्ञानिक रूप से किसी व्रत से इन परिणामों की गारंटी सिद्ध नहीं है।

🚩 आज का विशेष संदेश

भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी पर भगवान गणेश के हेरंब स्वरूप की आराधना कर भक्त संकटों से मुक्ति और जीवन में शुभता की कामना करते हैं। वाराणसी में आज रात करीब 8:05 बजे चंद्रोदय के बाद गणेश पूजा, चंद्रमा को अर्घ्य और व्रत पारण किया जा सकता है।

धार्मिक आस्था है कि सच्ची श्रद्धा, संयम और भगवान गणेश का स्मरण जीवन के कठिन समय में मनुष्य को धैर्य और सकारात्मक शक्ति प्रदान करता है।

— Bharat Times Today