वाराणसी। सावन के पावन महीने में आज रविवार को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। पंचांग के अनुसार इस बार श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 23 अगस्त को शुरू हुई और 24 अगस्त की सुबह तक रहेगी।

मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। विशेष रूप से संतान सुख और परिवार की मंगलकामना के लिए इस व्रत का धार्मिक महत्व बताया गया है। हालांकि, व्रत का मुख्य उद्देश्य भगवान विष्णु की भक्ति, आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना माना जाता है।

कैसे करें पूजा?

एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु का ध्यान किया जाता है। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर दीपक जलाएं। इसके बाद पुष्प, तुलसी दल, फल और नैवेद्य अर्पित कर विष्णु मंत्र का जाप करें। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रख सकते हैं।

एकादशी पर इन बातों का रखें ध्यान

एकादशी व्रत में अन्न ग्रहण न करने की परंपरा है। फल, दूध और अन्य सात्विक फलाहार का सेवन अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार किया जा सकता है। बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं या किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूर लें।

धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन भगवान विष्णु का स्मरण, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, भजन-कीर्तन और जरूरतमंदों की सेवा करना शुभ माना जाता है।

विशेष संयोग से बढ़ा धार्मिक उत्साह

रविवार को पड़ रही इस एकादशी को लेकर मंदिरों और घरों में श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। सुबह से ही भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और व्रत का क्रम शुरू हो गया। श्रद्धालु दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए सुख-शांति और परिवार की समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किए जाने वाले उपायों का उद्देश्य आस्था और आध्यात्मिक साधना है।