वाराणसी। काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला एक बार फिर श्रद्धालुओं को भक्ति और आस्था से सराबोर करने के लिए तैयार है। करीब 229 वर्षों से चली आ रही इस ऐतिहासिक रामलीला की तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। रामनगर की रामलीला अपनी अनूठी परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक मंचन शैली के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इसकी विशेषता को देखते हुए इसे यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ा जाता है।
करीब 10 किलोमीटर के विस्तृत क्षेत्र में बने 40 से अधिक खुले लीला स्थलों पर रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जाता है। लगभग 30 दिनों तक चलने वाली रामलीला को देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक रामनगर पहुंचते हैं। सामान्य दिनों में हजारों लोग अलग-अलग लीला स्थलों पर पहुंचते हैं, जबकि प्रमुख प्रसंगों के दौरान दर्शकों की संख्या काफी बढ़ जाती है।
रामनगर की वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार इस बार भी धार्मिक अनुष्ठानों के साथ रामलीला की शुरुआत की जा रही है। रामलीला अधिकारी पाठक जी ने यजमान के रूप में पंडित रामनारायण पांडेय से संकल्प पूजन कराया। पूजन के दौरान रामलीला के निर्विघ्न और सफल आयोजन के साथ राजा, प्रजा, श्रद्धालुओं तथा आयोजन से जुड़े सभी लोगों के कल्याण की कामना की गई।
पूजन और वैदिक अनुष्ठान पंडित रामनारायण पांडेय एवं शांत नारायण पांडेय ने मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ संपन्न कराया। अनुष्ठान में रामलीला के पंच स्वरूप भगवान श्रीराम, माता सीता, भरत, शत्रुघ्न और लक्ष्मण के साथ वशिष्ठ, दशरथ, रामलीला व्यास, रामायणी दल तथा अन्य सहयोगी पात्र शामिल रहे।
पूजन की शुरुआत भगवान गणेश की वंदना से हुई। रामायणी दल ने नारद वाणी में विनयपत्रिका की पंक्तियों का भावपूर्ण गायन किया। इसके बाद रामचरितमानस के बालकांड में मंगलाचरण से दोहे तक का पाठ किया गया। मानस की चौपाइयों और पदों के गायन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
25 सितंबर से रामलीला विधिवत शुरू होने की तैयारी है। इससे पहले धार्मिक अनुष्ठानों की कड़ी में गणेश पूजन भी संपन्न कराया गया। करीब दो घंटे चले पूजन, संकल्प और रामचरितमानस पाठ के दौरान रामनगर का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक नजर आया। श्रद्धालुओं में रामलीला को लेकर खासा उत्साह है और आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच रही हैं।