बुद्ध, कबीर, फुले, आंबेडकर, ललई यादव और सम्राट अशोक के विचारों पर भी हुई चर्चा

चंदौली। सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर बौद्ध महाविहार खजूरगांव में बौद्धिक एवं चिंतनशील ग्रामवासियों की ओर से बहुजन नायक और समाज सुधारक ई.वी. रामासामी पेरियार को अनोखे अंदाज में याद किया गया। कार्यक्रम में पेरियार के सामाजिक संघर्ष और विचारों पर चर्चा के साथ भगवान बुद्ध, संत कबीर, महात्मा ज्योतिबा फुले, डॉ. भीमराव आंबेडकर, ललई सिंह यादव और सम्राट अशोक सहित विभिन्न महापुरुषों के योगदान को भी स्मरण किया गया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि ई.वी. रामासामी पेरियार ने अपना पूरा जीवन सामाजिक असमानता, जातिगत भेदभाव, अंधविश्वास और रूढ़िवादी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष में लगाया। उनका उद्देश्य समाज में समानता, आत्म-सम्मान, तर्कशीलता और मानवतावादी सोच को मजबूत करना था। पेरियार ने दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में सामाजिक सुधार आंदोलनों को नई दिशा दी और आत्म-सम्मान आंदोलन के माध्यम से वंचित एवं पिछड़े वर्गों के अधिकारों की आवाज बुलंद की।

वक्ताओं ने कहा कि पेरियार महिलाओं की समानता और अधिकारों के भी प्रबल समर्थक थे। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, विवाह में स्वतंत्रता और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। इसके साथ ही उन्होंने लोगों को अंधविश्वास से दूर रहकर वैज्ञानिक एवं तार्किक सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में उत्तर भारत में पेरियार के विचारों के प्रचार-प्रसार में ललई सिंह यादव की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने उन्हें उत्तर भारत का पेरियार बताते हुए कहा कि उन्होंने सामाजिक न्याय और जाति-विरोधी विचारधारा को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चिंतन के दौरान यह भी कहा गया कि महापुरुषों को केवल उनकी जयंती या विशेष दिवस पर याद करना पर्याप्त नहीं है। उनके विचारों को समझकर समाज में समानता, भाईचारा, शिक्षा और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उपस्थित लोगों ने कहा कि आज भी समाज में रूढ़िवादी सोच और भेदभाव जैसी चुनौतियां मौजूद हैं, जिन्हें शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से दूर करने की जरूरत है।

कार्यक्रम में बुद्ध से करुणा, कबीर से तर्क और सामाजिक चेतना, फुले से शिक्षा एवं समानता, आंबेडकर से संवैधानिक अधिकार, सम्राट अशोक से मानवतावाद तथा पेरियार से आत्म-सम्मान और सामाजिक न्याय की प्रेरणा लेने का आह्वान किया गया।

इस अवसर पर युवाओं और ग्रामीणों से सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की गई।

प्रस्तुति : गोलेन्द्र पटेल, युवा कवि एवं लेखक