नई दिल्ली, 18 मार्च 2026। केंद्र सरकार ने विज्ञापनों में भ्रामक दावों, बच्चों की असुरक्षित छवि और निर्धारित मानकों के उल्लंघन पर सख्ती बढ़ा दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के तहत लागू विज्ञापन संहिता का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा।
मंत्रालय के अनुसार, विज्ञापन संहिता में ऐसे किसी भी दावे पर रोक है जिसे प्रमाणित करना कठिन हो या जो उत्पाद को चमत्कारी या अलौकिक गुणों वाला दर्शाए। साथ ही ऐसे विज्ञापन भी प्रतिबंधित हैं जो बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं, उन्हें अस्वस्थ आदतों के लिए प्रेरित करते हैं या उन्हें अनुचित तरीके से प्रस्तुत करते हैं। इसके अलावा, Advertising Standards Council of India (एएससीआई) द्वारा तय मानकों का उल्लंघन करने वाले विज्ञापनों के प्रसारण पर भी रोक है।
📊 तीन स्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली
सरकार ने केबल टेलीविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम, 2021 के तहत एक प्रभावी तीन-स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र लागू किया है:
- स्तर I: प्रसारकों द्वारा स्वयं नियमन
- स्तर II: स्व-विनियमन संस्थाओं द्वारा निगरानी
- स्तर III: केंद्र सरकार का निगरानी तंत्र
यदि किसी दर्शक को किसी विज्ञापन या कार्यक्रम पर आपत्ति होती है, तो वह सीधे प्रसारक को शिकायत दे सकता है। विज्ञापन से जुड़ी शिकायतों के लिए एएससीआई भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत 60 दिनों में निर्णय देता है।
⚖️ उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई
सरकार द्वारा गठित अंतर-विभागीय समिति (IDC) ऐसे मामलों की सुनवाई करती है। यदि कोई चैनल विज्ञापन संहिता का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ चेतावनी, माफी, सलाह या प्रसारण बंद करने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
🆕 भ्रामक विज्ञापनों पर नई पहल
सुप्रीम कोर्ट के आदेश (07 मई 2024) के अनुपालन में मंत्रालय ने:
- टीवी/रेडियो विज्ञापनों के लिए ब्रॉडकास्ट सेवा पोर्टल
- प्रिंट/इंटरनेट विज्ञापनों के लिए प्रेस परिषद पोर्टल
पर Self-Declaration Certificate (SDC) अपलोड करने की व्यवस्था शुरू की है। खासकर खाद्य और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विज्ञापनों के लिए यह अनिवार्य किया गया है।
🚫 सट्टेबाजी विज्ञापनों से दूरी की सलाह
मंत्रालय ने मीडिया संस्थानों को ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म और उनके वैकल्पिक उत्पादों के विज्ञापनों से दूर रहने की सलाह दी है। इसके लिए 2022 और 2023 में कई परामर्श जारी किए जा चुके हैं।
🛡️ उपभोक्ता हितों की सुरक्षा
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत नियमों के तहत झूठे और भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अनुसार की जाती है। इसके लिए 2022 में विशेष दिशा-निर्देश भी लागू किए गए हैं।
यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने लोकसभा में लिखित उत्तर के दौरान दी।