UP में शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन: अवैध स्कूल और कोचिंग संस्थानों पर राज्यव्यापी अभियान, 6–18 अप्रैल तक चलेगी सघन जांच
प्रयागराज/शिक्षा | BTT NEWS (विशेष रिपोर्ट)
UP/शिक्षा :: उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के सभी जनपदों में बिना मान्यता संचालित विद्यालयों और नियमों के विपरीत चल रही निजी कोचिंग संस्थाओं के खिलाफ 06 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक विशेष सघन निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा।
यह आदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के सचिव द्वारा जारी किया गया है, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अवैध शैक्षणिक गतिविधियों को हर हाल में रोका जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
क्यों जरूरी पड़ा यह अभियान?
शिक्षा विभाग को लगातार मिल रही शिकायतों में यह सामने आया कि—
- कई स्थानों पर बिना मान्यता के विद्यालय संचालित हो रहे हैं
- मान्यता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक निजी कोचिंग संस्थानों में पढ़ा रहे हैं
- कुछ संस्थान अनधिकृत छात्रों का प्रवेश लेकर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं
इससे न सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है।
कानून क्या कहता है? (नियमों का सख्त हवाला)
1. उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियम अधिनियम, 2002
- किसी भी मान्यता प्राप्त विद्यालय का शिक्षक निजी कोचिंग में पढ़ाने का कार्य नहीं कर सकता
- उल्लंघन करने पर शिक्षक और संस्था दोनों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय
2. शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 – धारा 18
- बिना मान्यता के विद्यालय खोलना और संचालित करना पूरी तरह प्रतिबंधित
- दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई
3. परिषद के विनियम (Regulation 11 व 18)
- केवल मान्यता प्राप्त विषयों/कक्षाओं में ही प्रवेश मान्य
- अनधिकृत प्रवेश या संचालन पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई

हर जिले में बनी हाई-लेवल जांच टीम
शासन के निर्देश पर प्रत्येक जनपद में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है, जिसमें शामिल हैं—
- जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) – अध्यक्ष
- जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) – सदस्य
- खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) – सदस्य
यह समिति जमीनी स्तर पर जांच कर अवैध संस्थानों की पहचान करेगी।
कैसे चलेगा अभियान? (Action Plan)
- 06 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक सघन निरीक्षण
- जिलेवार टीम द्वारा स्कूल और कोचिंग सेंटरों की जांच
- बिना मान्यता वाले विद्यालयों को चिन्हित कर सील/कार्रवाई
- कोचिंग में पढ़ाने वाले शिक्षकों की पहचान
- दोषी पाए जाने पर तत्काल विधिक कार्रवाई
हर जिले को निम्न बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी—
- अवैध विद्यालयों की कुल संख्या
- उनके खिलाफ की गई कार्रवाई
- निजी कोचिंग में संलिप्त शिक्षकों की संख्या
- संबंधित शिक्षकों/संस्थाओं पर की गई कार्रवाई
यह रिपोर्ट 30 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से शासन को भेजनी होगी।
आदेश में साफ कहा गया है कि— यदि किसी अधिकारी द्वारा इस अभियान में लापरवाही, देरी या शिथिलता बरती गई
👉 तो इसे न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) माना जाएगा
यानी अब अधिकारियों की जवाबदेही भी पूरी तरह तय कर दी गई है।
क्या होगा असर? (विश्लेषण)
- फर्जी और अवैध स्कूलों पर लगेगी रोक
- छात्रों को मिलेगा सुरक्षित और मान्यता प्राप्त शिक्षा वातावरण
- कोचिंग माफिया और नियम तोड़ने वाले शिक्षकों पर शिकंजा
- शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन बढ़ेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान अगर सख्ती से लागू हुआ तो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।