केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव लागू करने का निर्देश जारी किया है। बोर्ड ने थ्री लैंग्वेज सिस्टम को अनिवार्य करते हुए सभी संबद्ध स्कूलों को आदेश दिया है कि वे अगले 7 दिनों के भीतर इस नई व्यवस्था को लागू करें। यह कदम National Curriculum Framework 2023 (NCF 2023) की सिफारिशों के तहत उठाया गया है, जिसमें बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

सबसे खास बात यह है कि CBSE ने स्कूलों को आधिकारिक किताबों का इंतजार किए बिना ही तीसरी भाषा की पढ़ाई शुरू करने को कहा है। बोर्ड के अनुसार, जब तक नई पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक स्कूल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और अन्य पुस्तकों का उपयोग करके पढ़ाई जारी रखें। इस निर्देश को “अत्यंत आवश्यक” श्रेणी में रखा गया है, जिससे स्पष्ट है कि इसमें किसी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

क्या है नया थ्री लैंग्वेज सिस्टम?

नई व्यवस्था के तहत कक्षा 6 के छात्रों को अब तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिन्हें R1, R2 और R3 के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसमें सामान्यतः एक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा, एक मुख्य भाषा (जैसे हिंदी या अंग्रेजी) और एक अतिरिक्त भाषा शामिल होगी। स्कूलों को भारतीय या विदेशी भाषाओं में से विकल्प चुनने की स्वतंत्रता दी गई है।

महत्वपूर्ण नियम यह है कि छात्र जिस तीसरी भाषा का चयन कक्षा 6 में करेंगे, उसी भाषा को उन्हें कक्षा 9 और 10 तक जारी रखना होगा। ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को भाषा चयन में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

स्कूलों और छात्रों पर प्रभाव

CBSE ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे चुनी गई भाषा की जानकारी अपने क्षेत्रीय कार्यालय और OASIS पोर्टल पर अपडेट करें। इस बदलाव के चलते छात्रों का शैक्षणिक भार बढ़ सकता है, क्योंकि अब उन्हें तीन भाषाओं में दक्षता हासिल करनी होगी।

वहीं, स्कूलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कम समय में योग्य भाषा शिक्षकों की व्यवस्था और संसाधनों का प्रबंधन करना है। हालांकि, बोर्ड का मानना है कि यह कदम छात्रों की भाषाई क्षमता और सांस्कृतिक समझ को मजबूत करेगा।

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