नई दिल्ली। महिला पत्रकार नफीसा एव और शाहीन के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद घटना को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। मामले को प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की मांग उठाई गई है।
जारी बयान में कहा गया कि पत्रकारों का काम समाज से जुड़े मुद्दों को सामने लाना, सवाल पूछना और लोगों तक सच्चाई पहुंचाना है। ऐसे में पत्रकारों के साथ कथित तौर पर मारपीट या दबाव बनाने की कोशिश लोकतंत्र, कानून के शासन और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
बयान में कहा गया कि यदि किसी पत्रकार के साथ पुलिस की ओर से दुर्व्यवहार या मारपीट की घटना हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। जांच के दौरान घटना से जुड़े सभी तथ्यों, प्रत्यक्षदर्शियों और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
मांग की गई कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी की गलती या कानून का उल्लंघन सामने आता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
बयान में लोकतंत्र में जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा गया कि पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब कानून और संवैधानिक व्यवस्था के दायरे में दिया जाना चाहिए। लोकतंत्र में सवालों का जवाब लाठी से नहीं, बल्कि जवाबदेही से दिया जाना चाहिए।
घटना को लेकर निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होने की बात कही गई है।