NEET-UG विवाद के बाद बड़ा फैसला, शिक्षा मंत्रालय की कमान अब प्रल्हाद जोशी के हाथों में; परीक्षा सुधार और NTA की साख बहाल करना होगी सबसे बड़ी चुनौती
नई दिल्ली: देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक खबर सामने आई है। NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस बदलाव को शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान ने क्यों दिया इस्तीफा?
NEET-UG परीक्षा के परिणामों और पेपर लीक के आरोपों को लेकर पिछले कुछ समय से देशभर में छात्रों और विभिन्न संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई स्थानों पर छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग उठाई।
अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्हें छात्रों के भविष्य और देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। उन्होंने लिखा कि किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी विवादों में प्रभावित न हो और आंदोलन का गलत लाभ कोई असामाजिक तत्व न उठा सके, इसलिए वे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं।
कौन हैं प्रल्हाद जोशी?
प्रल्हाद जोशी वर्तमान में केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे हैं। अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
प्रल्हाद जोशी की प्रमुख बातें:
- कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार सांसद।
- लंबे संसदीय अनुभव के साथ संगठन और प्रशासन में सक्रिय भूमिका।
- परीक्षा प्रणाली में तकनीक आधारित पारदर्शिता लाने के पक्षधर।
नए शिक्षा मंत्री के सामने प्रमुख चुनौतियां
1. NTA में सुधार: NEET, CUET और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करना।
2. छात्रों का विश्वास जीतना: देशभर में विरोध कर रहे छात्रों और अभिभावकों का भरोसा दोबारा कायम करना।
3. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020): नई शिक्षा नीति के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन को आगे