वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में देश की महत्वाकांक्षी काशी रोपवे परियोजना अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। पहले चरण का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद अब दूसरे चरण का परीक्षण भी शुरू कर दिया गया है। इस परियोजना के शुरू होने से काशीवासियों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
भारत का पहला शहरी सार्वजनिक परिवहन रोपवे
काशी रोपवे को भारत का पहला और दुनिया का तीसरा शहरी सार्वजनिक परिवहन रोपवे बताया जा रहा है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य वाराणसी की सड़कों पर बढ़ते यातायात के दबाव को कम करना और यात्रियों को आधुनिक, सुरक्षित एवं सुविधाजनक परिवहन सेवा उपलब्ध कराना है।
महज 15 मिनट में कैंट से गोदौलिया का सफर
काशी रोपवे परियोजना की कुल लंबाई लगभग 3.75 से 3.85 किलोमीटर है। यह रोपवे वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन को गोदौलिया क्षेत्र से जोड़ेगा। पूरे मार्ग पर कुल पांच स्टेशन और 29 टावर बनाए गए हैं। रोपवे सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को कैंट से गोदौलिया तक पहुंचने में लगभग 15 मिनट का समय लगेगा।
जाम से मिलेगी राहत, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
वाराणसी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन और गंगा आरती में शामिल होने पहुंचते हैं। ऐसे में शहर की प्रमुख सड़कों पर अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है।
रोपवे सेवा शुरू होने से यात्रियों को सड़क पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी। साथ ही पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल परियोजना के दूसरे चरण का ट्रायल जारी बताया जा रहा है। निर्माण कार्य पूरा होने और आवश्यक सुरक्षा परीक्षणों के बाद ही यात्रियों के लिए रोपवे सेवा शुरू की जाएगी।