📌 तीसरी निशा में शास्त्रीयता और भक्ति का अद्भुत संगम, उल्हास कशालकर की राग प्रस्तुति ने जमाया रंग..

वाराणसी ब्यूरो। प्रसिद्ध संकट मोचन संगीत समारोह की तीसरी निशा भक्ति, शास्त्रीयता और लयकारी के अद्भुत संगम की साक्षी बनी। पूरी रात चले इस आयोजन में सुरों की साधना और ताल की गूंज ने हनुमत दरबार को संगीत की दिव्यता से सराबोर कर दिया।कार्यक्रम की शुरुआत परंपरा के अनुसार भगवान हनुमान की आराधना और मंगलाचरण से हुई, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

उल्हास कशालकर की दमदार शुरुआतमंच की पहली प्रस्तुति प्रख्यात शास्त्रीय गायक उल्हास कशालकर ने दी। उन्होंने ग्वालियर घराने की विशिष्ट शैली में गंभीर और पारंपरिक रागों का ऐसा विस्तार किया कि श्रोता देर रात तक मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे।उनकी प्रस्तुति ने शास्त्रीय संगीत की गहराई और परंपरा को जीवंत कर दिया।

मुख्य आकर्षण: जसपिंदर नरुला ने बांधा समांइसके बाद मंच संभाला सुप्रसिद्ध गायिका जसपिंदर नरुला ने, जिनकी प्रस्तुति इस निशा का मुख्य आकर्षण रही।

उन्होंने भक्ति और शास्त्रीय संगीत का ऐसा अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया कि पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।मधुर स्वरभावपूर्ण अभिव्यक्तिसुरों की गहराईइन सबने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। हर बंदिश के बाद गूंजती तालियों ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।

रातभर गूंजते रहे सुर, भक्ति में डूबा काशीपूरी रात चले इस आयोजन में संगीत साधना की अद्भुत छटा देखने को मिली। सुरों और ताल की संगति ने संकट मोचन दरबार को एक दिव्य संगीत लोक में बदल दिया, जहां श्रोता भक्ति और शास्त्रीयता के संगम में पूरी तरह डूबे नजर आए।

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