चंदौली, रेवसा, 13 अगस्त। रेवसा क्षेत्र में विद्यालय भवन के निर्माण में हो रही देरी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बताया जा रहा है कि विद्यालय के पुराने भवन को मार्च माह में जर्जर बताकर ध्वस्त कर दिया गया था। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन पूरी तरह से ध्वस्तीकरण योग्य नहीं था। उनका दावा है कि मुख्य समस्या छत से पानी टपकने की थी, जिसे मरम्मत कर काफी हद तक दूर किया जा सकता था। यदि केवल छत की उचित मरम्मत कराई जाती तो सरकारी राजस्व की बड़ी बचत संभव थी।
वर्तमान में विद्यालय में करीब 87 विद्यार्थी और 5 शिक्षक हैं, जबकि पढ़ाई के लिए मात्र एक कमरे की व्यवस्था है। ऐसे में विद्यार्थियों को बगल स्थित पंचायत भवन में किसी तरह पढ़ाया जा रहा है। वहीं, पंचायत भवन को लेकर ग्राम प्रधान की ओर से भी आपत्ति जताई गई है और भवन को जल्द खाली करने की बात कही जा रही है।
विद्यालय भवन के निर्माण में हो रही देरी को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर निर्माण कार्य में इतनी देरी क्यों हो रही है? पुराने भवन को ध्वस्त करने की आवश्यकता वास्तव में थी या नहीं, यह भी जांच का विषय बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार विद्यालय के पास उपलब्ध भूमि काफी सीमित है। ऐसे में विद्यालय से सटी ग्रामसभा की भूमि पर कथित अतिक्रमण की स्थिति की राजस्व विभाग द्वारा जांच कराकर उसे नियमानुसार मुक्त कराया जाए तथा उपलब्ध भूमि का व्यवस्थित उपयोग करते हुए विद्यालय भवन का निर्माण कराया जाए। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा और यह कदम जनहित एवं राष्ट्रहित में उपयोगी होगा।
— सुरेश गुप्ता, चंदौली