चंदौली, रेवसा (धुस), 10 अगस्त। सकलडीहा ब्लॉक के बड़े गांवों में शामिल रेवसा (धुस) की आबादी करीब 8 हजार से अधिक बताई जाती है। गांव में छोटे-बड़े कई तालाब मौजूद हैं, लेकिन इनमें से कई तालाबों का अस्तित्व अब लगभग समाप्त हो चुका है। आरोप है कि कुछ लोगों ने तालाबों को पाटकर उन पर निर्माण कर लिया है। वहीं, जो तालाब बचे हैं, वे भी अतिक्रमण और उपेक्षा के कारण अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

गांव में भगवान राम और माता सीता का एक ऐतिहासिक मंदिर भी है, जो एक ट्रस्ट के अधीन बताया जाता है। मंदिर परिसर करीब डेढ़ बीघा भूमि में स्थित है। आरोप है कि इसके आसपास की जमीन भी अवैध निर्माण और कब्जे की चपेट में आ रही है।

इसी गांव की गोंड बस्ती में स्थित एक तालाब को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बताया जाता है कि यह तालाब करीब 8 बिस्वा क्षेत्रफल में है और खतौनी संख्या 954ग एवं 954घ से संबंधित है। आरोप है कि तालाब की भूमि पर लगातार निर्माण कार्य कराया जा रहा है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि निर्माण का विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। उनका आरोप है कि निर्माण करने वालों को कुछ स्थानीय लोगों और नेताओं का संरक्षण प्राप्त है। मामले की जांच के लिए तहसीलदार की ओर से लेखपाल को निर्देश दिए जाने की बात कही गई है, लेकिन आरोप है कि करीब दो महीने बीतने के बावजूद मौके पर प्रभावी जांच नहीं हुई।

शिकायतकर्ता ने लेखपाल अमित पाल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि उक्त तालाब को अतिक्रमण से मुक्त कराकर उसका सुंदरीकरण कराया जाए तो स्थानीय लोगों को विशेष रूप से छठ पर्व के दौरान काफी सुविधा मिल सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मौके की जांच कराकर तालाब की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने तथा जलस्रोत के संरक्षण और सुंदरीकरण की मांग की है।

जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर शासन स्तर पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है। ऐसे में रेवसा के तालाबों की स्थिति की निष्पक्ष जांच कराकर उनके पुराने स्वरूप को बहाल करना ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

रिपोर्ट — सुरेश गुप्ता, चंदौली