चंदौली। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के मुगलसराय स्थित कैलाशपुरी मोड़ पर पकड़े गए साइबर ठगी गिरोह के तार जापान और चीन से जुड़े होने की बात सामने आई है। पुलिस और साइबर सेल की जांच के अनुसार, गिरोह कथित तौर पर जापानी नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करता था। ठगी की रकम चीनी बैंक खातों में भेजने और फिर हवाला के जरिए गिरोह तक पहुंचाने का नेटवर्क संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
फर्जी कस्टमर केयर के जरिए करते थे ठगी
जानकारी के अनुसार, गिरोह के सदस्य पिछले छह महीने से एक इमारत में बैठकर साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे। आरोपी जापान में रहने वाले लोगों को निशाना बनाते थे। जब किसी व्यक्ति के कंप्यूटर, लैपटॉप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में तकनीकी खराबी आती थी, तो वह गूगल पर संबंधित कंपनी का कस्टमर केयर नंबर खोजता था। इसी दौरान लोगों को गिरोह की ओर से तैयार किया गया कथित फर्जी कस्टमर केयर ऐप या नंबर मिल जाता था।
पीड़ितों को लगता था कि वे संबंधित कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि से बात कर रहे हैं। बातचीत के दौरान आरोपी उनसे ओटीपी जनरेट करवाते थे और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी हासिल कर खातों से रकम निकाल लेते थे।
चीन के बैंक खातों में भेजी जाती थी रकम
बताया जा रहा है कि ठगी से प्राप्त धनराशि पहले चीनी बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती थी। इसके बाद हवाला नेटवर्क के माध्यम से रकम गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुंचाई जाती थी। इस तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर ठगी और धन के लेन-देन का नेटवर्क संचालित होने की आशंका जताई गई है।
हर महीने करोड़ों की ठगी का दावा
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, गिरोह पर हर महीने करीब 10 से 12 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप है। हालांकि, इस रकम और पूरे नेटवर्क की पुष्टि जांच के निष्कर्षों तथा आधिकारिक पुलिस जानकारी से होना बाकी है।
मुगलसराय में हुई इस कार्रवाई के बाद पुलिस और साइबर सेल गिरोह के अन्य सदस्यों, बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और हवाला नेटवर्क की कड़ियों की जांच में जुटी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों से इस अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क के अन्य पहलुओं का खुलासा हो सकता है।