नई दिल्ली/वाराणसी। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला धनतेरस का पर्व आज 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को पूरे देश में मनाया जा रहा है। इसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। पांच दिवसीय दीपावली महापर्व का शुभारंभ इसी दिन से होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से आरोग्य, माता लक्ष्मी की पूजा से सुख-समृद्धि और भगवान कुबेर की आराधना से धन-धान्य की प्राप्ति की कामना की जाती है। इस दिन सोना, चांदी, नए बर्तन और अन्य शुभ वस्तुएं खरीदने की भी परंपरा है।
आखिर क्यों मनाया जाता है धनतेरस?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इसी कारण धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। उनके प्राकट्य दिवस पर स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरोगी जीवन की कामना से पूजा-अर्चना की जाती है।
वहीं, इस दिन माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस पर घर में स्वच्छता, दीपदान और शुभ वस्तुओं की खरीदारी से समृद्धि का आगमन होता है।
धनतेरस 2026: वाराणसी के अनुसार पंचांग
दिनांक: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
पर्व: धनत्रयोदशी (धनतेरस)
पक्ष: कृष्ण पक्ष
मास: कार्तिक (पूर्णिमांत)
तिथि: त्रयोदशी
त्रयोदशी प्रारंभ: सुबह लगभग 10:30 बजे
त्रयोदशी समाप्त: 7 नवंबर सुबह लगभग 10:47 बजे
सूर्योदय: सुबह 6:09 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:14 बजे
नक्षत्र: हस्त (रात्रि लगभग 4:43 बजे तक, 7 नवंबर)
योग: विष्कम्भ
पंचांग की गणना वाराणसी के स्थानीय समय के अनुसार है।
धनतेरस 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार वाराणसी में धनतेरस पर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा के लिए विशेष प्रदोषकालीन मुहूर्त निम्न है:
- धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 5:44 बजे से 7:42 बजे तक।
- प्रदोष काल: शाम 5:14 बजे से 7:49 बजे तक।
- वृषभ काल: शाम 5:44 बजे से 7:42 बजे तक।
- यम दीपदान: सूर्यास्त के बाद प्रदोषकाल में किया जा सकता है।
यह समय विशेष रूप से लक्ष्मी-कुबेर पूजन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
आज किसकी पूजा विशेष रूप से करनी चाहिए?
धनतेरस पर मुख्य रूप से तीन देवताओं की पूजा का विशेष विधान है।
1. भगवान धन्वंतरि: स्वास्थ्य, आरोग्य और दीर्घायु की कामना के लिए भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है।
2. माता लक्ष्मी: धन, वैभव, सुख-समृद्धि और परिवार में खुशहाली के लिए मां लक्ष्मी की आराधना की जाती है।
3. भगवान कुबेर: धन के देवता कुबेर की पूजा आर्थिक समृद्धि और धन-धान्य की कामना से की जाती है।
इसके अतिरिक्त शाम को यमराज के निमित्त दीपदान करने की भी परंपरा है।
धनतेरस पूजा की संपूर्ण विधि
धनतेरस के दिन श्रद्धालु निम्न विधि से पूजा कर सकते हैं।
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर, पूजा स्थल और मुख्य द्वार की अच्छी तरह साफ-सफाई करें।
- पूजा स्थल पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- भगवान के सामने घी या तेल का दीपक जलाएं।
- रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करें।
- भगवान धन्वंतरि को पीले पुष्प और भोग अर्पित करें।
- माता लक्ष्मी और कुबेर देव का विधिवत पूजन करें।
- संबंधित मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें।
- शाम को घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं।
- यमराज के निमित्त दक्षिण दिशा में दीपदान करें।
पूजा के बाद परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना करें।
धनतेरस के विशेष मंत्र
1. भगवान धन्वंतरि मंत्र
ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलश हस्ताय सर्वभयविनाशाय सर्वरोगनिवारणाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः।
2. माता लक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
3. भगवान कुबेर मंत्र
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।
4. यमराज दीपदान मंत्र
मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥
इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर निम्न वस्तुओं की खरीदारी शुभ मानी जाती है:
- सोना और चांदी।
- पीतल और तांबे के बर्तन।
- नए घरेलू बर्तन।
- पूजा-पाठ की सामग्री।
- झाड़ू।
- भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमा।
- आवश्यकता के अनुसार घरेलू उपयोग की वस्तुएं।
खरीदारी अपनी आर्थिक क्षमता और आवश्यकता के अनुसार ही करनी चाहिए। किसी वस्तु को खरीदना अनिवार्य नहीं है।
धनतेरस पर क्या करना चाहिए?
- घर और आसपास स्वच्छता बनाए रखें।
- जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र का दान करें।
- भगवान धन्वंतरि की पूजा कर अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।
- शाम को घर में दीपक जलाएं।
- माता लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना करें।
- परिवार के सदस्यों के साथ प्रेम और सद्भाव बनाए रखें।
- अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करें।
धनतेरस पर क्या नहीं करना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
- घर में गंदगी और अव्यवस्था न रखें।
- किसी से झगड़ा या अपशब्दों का प्रयोग न करें।
- धन का अनावश्यक अपव्यय न करें।
- किसी जरूरतमंद का अपमान न करें।
- पूजा के समय मन में नकारात्मक विचार न रखें।
- बिना आवश्यकता कर्ज लेकर खरीदारी करने से बचें।
- दीपक जलाते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें।
धनतेरस का वास्तविक संदेश क्या है?
धनतेरस केवल सोना-चांदी और धन की खरीदारी का पर्व नहीं है। इसका वास्तविक संदेश स्वास्थ्य, स्वच्छता, आर्थिक अनुशासन, सेवा और समृद्ध जीवन से जुड़ा है।
भगवान धन्वंतरि की पूजा हमें स्वास्थ्य के महत्व का संदेश देती है, माता लक्ष्मी की आराधना समृद्धि और सदाचार की प्रेरणा देती है, जबकि कुबेर पूजन धन के सदुपयोग का महत्व बताता है।
इसलिए धनतेरस पर केवल धन अर्जित करने की नहीं, बल्कि स्वस्थ, सुखी और संतुलित जीवन की कामना भी करनी चाहिए।
Bharat Times Today की ओर से सभी देशवासियों को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं।