दुल्हीपुर मुहर्रम की 10 तारीख पर शुक्रवार शाम के मुख्य बाजार में दुलदुल का जुलूस पूरी अकीदत के साथ निकाला गया। इमाम हुसैन के घोड़े ‘जुलजनाह’ के प्रतीक के रूप में सजाए गए सफेद दुलदुल घोड़े को देखने के लिए बाजार में अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस जुलूस में ताजिया और अलम भी शामिल थे। दुलदुल घोड़े को सफेद चादर और लाल निशानों के साथ सजाया गया था, जो कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन के घायल घोड़े की याद दिलाता है। घोड़े के आगे-पीछे अंजुमन के लोग नौहा-मातम करते हुए चल रहे थे। इस दौरान सिर पर सफेद पट्टी बांधे अकीदतमंद ‘या हुसैन, या हुसैन’ की सदाएं बुलंद कर रहे थे। कई नौजवान मातम करते हुए जुलूस के साथ चल रहे थे। माहौल गमगीन था। लोग अपने घरों की छतों से और सड़क किनारे खड़े होकर दुलदुल की जियारत कर रहे थे। प्रमुख मार्गों से होता हुआ कर्बला पहुंचा, जहां देर शाम ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। पुलिस प्रशासन ने जुलूस को शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न कराया।

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