लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता लाने और मरीजों से मनमानी वसूली पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने अस्पताल परिसरों में संचालित फार्मेसियों के लिए दवाओं की वास्तविक खरीद और बिक्री कीमत सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं। यह व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से लागू होने की उम्मीद है।

नए निर्देश के तहत अस्पताल की ऐसी फार्मेसियों में, जहां मरीजों के पास दवाएं खरीदने का व्यावहारिक विकल्प सीमित होता है, दवाओं की खरीद दर और मरीज से ली जाने वाली बिक्री दर के आधार पर मूल्य सूची प्रदर्शित करनी होगी। इससे मरीजों को यह पता चल सकेगा कि संबंधित दवा फार्मेसी ने कितने रुपये में खरीदी और कितने रुपये में बेची जा रही है।

यह कार्रवाई उस समय सामने आई है जब यूपीएफएसडीए की 22 मेडिकल कॉलेजों और 30 सरकारी व निजी अस्पतालों की 200 से अधिक फार्मेसियों में हुई जांच में कुछ दवाओं, मेडिकल उपकरणों और अन्य उत्पादों की खरीद कीमत तथा मरीजों से वसूली जाने वाली कीमत में काफी अंतर पाया गया। कुछ मामलों में यह अंतर 67 गुना तक बताया गया है।

विभाग ने इस मामले में राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) से भी नियामकीय हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि दवाओं की खरीद कीमत और MRP के बीच अत्यधिक अंतर के मामलों पर प्रभावी कार्रवाई हो सके।

इसके अलावा प्रदेश की रिटेल फार्मेसियों को अपनी सार्वजनिक वेबसाइट पर लाइसेंस नंबर, नियुक्त फार्मासिस्ट, लाइसेंसी परिसर और स्टॉक से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने तथा उसे नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार के इस कदम से दवा कारोबार में पारदर्शिता बढ़ने और मरीजों को दवाओं की कीमत समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।